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नई दिल्ली, 06 जनवरी 2020, (आरएनआई )। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में हुई हिंसा और पुलिस की लेटलतीफी पर एक ओर कई कॉलेज के छात्रों ने समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ कई राजनीतिक दलों ने इस हिंसा की निंदा करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से लेकर कांग्रेस नेता राहुल-प्रियंका और मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक की इस विवाद में प्रतिक्रिया आ गयी है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि जेएनयू में हिंसा की खबर से हैरान हूं। स्टूडेंट्स पर हमला किया गया है। पुलिस को फौरन हिंसा रोकनी चाहिए और शांति कायम करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया, ‘अगर हमारे छात्र विश्वविद्यालय कैंपस में सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश कैसे आगे बढ़ेगा।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘नकाबपोशों द्वारा जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर किया गया क्रूर हमला, जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए, चौंकाने वाला है।’ उन्होंने ट्वीट किया कि हमारे बहादुर छात्रों की आवाज़ से फांसीवादी डरते हैं। जेएनयू में आज हुई हिंसा उसी डर का प्रतिबिंब है।’

प्रियंका गांधी एम्स में घायल छात्रों से मिलने पहुंची, जिसके बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘घायल छात्रों ने मुझे बताया कि गुंडों ने परिसर में एंट्री की और उन पर लाठी और अन्य हथियारों से हमला किया। कई के सिर और शरीर पर चोट के निशान थे। एक छात्र ने उन्हें बताया कि पुलिस ने उसके सिर पर कई बार लात मारी।’

उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी जेएनयू हिंसा की निंदा करते हुए ट्वीट किया, JNU में जिस तरह नक़ाबपोश अपराधियों ने छात्रों और अध्यापकों पर हिंसक हमला किया है वो बेहद निंदनीय है. इस विषय में तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच होनी चाहिए।’

सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा हिंसा और नफ़रत फैलाने का काम कर रही है। वहीं एबीवीपी भाजपा के सैनिकों की तरह नफरत और हिंसा रही है।

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने ट्वीट किया, ‘JNU में छात्रों व शिक्षकों के साथ हुई हिंसा अति-निन्दनीय व शर्मनाक। केन्द्र सरकार को इस घटना को अति-गम्भीरता से लेना चाहिये। साथ ही इस घटना की न्यायिक जाँच हो जाये तो यह बेहतर होगा।’