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पटना, 11 मई (आरएनआई) | बिहार सरकार की मुश्किलें अब बढ़ने वाली है. सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद अब नियोजित शिक्षक हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं. शिक्षकों ने सुप्रीमकोर्ट में अपनी हार को सरकार की साजिश बताया हैं. प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव आनंद मिश्रा ने चेतावनी दी है कि गर्मी छुट्टी के बाद शिक्षक सरकार से लड़ने को तैयार है और शिक्षक हड़ताल पर जा सकते हैं. इसके लिए अगली रणनीति तैयार की जा रही है। शिक्षक संघ ने बिहार सरकार को शिक्षक विरोधी करार दिया और कहा कि सरकार की मंशा है कि स्कूलों में पठन-पाठन ठप कर दिया जाए. शिक्षकों के साथ-साथ गरीब बच्चों के साथ भी छलावा हो रहा है।

संघ महासचिव ने कहा कि सरकार के खिलाफ सभी संघ बड़े आनंदोलन की तैयारी कर रही है और सरकार को लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में भी इसका जवाब दिया जाएगा।। इससे पहले बिहार के नियोजित शिक्षकों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अपनी लड़ाई जारी रखने का फैसला किया. शिक्षकों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का भी निर्णय लिया है. शिक्षकों के वकील राकेश कुमार मिश्रा ने चैनल को बताया कि इस फैसले के खिलाफ हम एक पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।

गौरतलब हैं कि बिहार सरकार की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर कर कहा गया था कि नियोजित टीचर पंचायती राज निकायों के कर्मी हैं और बिहार सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, ऐसे में इन्हें सरकारी टीचरों के बराबर सैलरी नहीं दी जा सकती। वहीं केंद्र सरकार नियोजित शिक्षकों को समान वेतन देने के लिए राशि बढ़ाने पर सहमत नहीं दिखी थी. सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा था कि शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन देना राज्य सरकार का काम है. इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है. केंद्र ने तर्क दिया था कि नियमित शिक्षकों की बहाली बीपीएससी के माध्यम से हुई है. वहीं नियोजित शिक्षकों की बहाली पंचायती राज संस्था से ठेके पर हुई है, इसलिए इन्हें समान वेतन नहीं दिया जा सकता है।