सरकार आयकरदाताओं पर कर का बोझ कम करने के लिए बड़ा आयकर सुधार कर सकती है. सूचना के मुताबिक मौजूदा कर दुरुस्त करने का काम लगभग पूरा हो चुका है, हालाकि 2019-20 के आम बजट  से पहले जनता की उम्मीदों को लेकर इसे रोका गया है. एक अधिकारी ने बताया , ” कि प्रत्यक्ष कर कानून बनने का काम पूरा हो गया है और इसे बजट पेश होने के बाद लाया जा सकता

उन्होंने कहा कि अगर ड्राफ्ट अभी आता हैं तो अनजान उम्मीदें बड़ सकती हैं लेकिन अधिकारी ने संकेत देते हुए नए कानून में नौकरी करने वाले लोगों पर लगने वाले कर का बोझ मे कमी आ सकती हैं, और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाएगी. इस कानून के चलते करदाताओं की सख्या में वृद्धि होगी. दशकों पुराने आयकर अधिनियम की जगह आने वाले नए कानून का ड्राफ्ट के लिए टास्क फोर्स को उसकी रिपोर्ट सौंपने के लिए 26 मई को दो महीने का समय और दिया गया था. मौजूदा कानून 50 साल पुराना है इसी लिए भारत सरकार ने फिर से कानून बनाने को कहा और 1 नवंबर 2017 में समिति का गठन किया। सीबीडीटी के सदस्य अखिलेश रंजन टास्क फोर्स के अध्यक्ष हैं। इसके सदस्यों में गिरीश आहूजा (चार्टर्ड अकाउंटेंट), राजीव मेमानी (ईवाई इंडिया के चेयरमैन व रीजनल मैनेजिंग पार्टनर), मुकेश पटेल (प्रैक्टिसिंग टैक्स एडवोकेट), मानसी केडिया (कंसल्टेंट आईसीआरआईईआर) और जी. सी. श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी व अधिवक्ता) शामिल हैं.