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शाहीन बाग के शानदार संघर्ष की दास्तां रोज़ टीवी चैनलों पर लिखी जा रही है। सुधीर से लेकर रविश तक रोज़ अपनी अपनी कथा सुना रहे हैं। लेकिन लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर पुलिस क्या कर रही है , क्यों कुछ नहीं कर रही । तो मुझे लग रहा है कि 8फरवरी तक वेट एंड वॉच की रणनीति पर काम किया जा रहा है। बीजेपी समझ रही है कि अभी हाथ डालने का वक्त नहीं है। चुनाव सिर पर हैं ।

कुछ भी छेड़ छाड़ आम आदमी पार्टी को ज्यादा फायदा पहुंचा सकती है। रोड जाम में फंसे लोग शाहीन बाग के प्रोटेस्ट से तंग आते जा रहे हैं। दिल्ली में करीब एक करोड़ से ज्यादाा वाहन रोज़ सड़क पर होते हैं। मतलब लगभग आधी आबादी सड़क पर होती है। इनमें से चौथाई लोग भी अगर शाहीन बाग की वजह से जाम में फंस रहे हैं तो निश्चित ही उनकी आंदोलनकारियों के प्रति सहानुभूति कम हो रही होगी।

इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी जानती है कि बिना शाहीन बाग गए भी वहां के लोग उसी को वोट देंगे। इसलिए वो भी इस मुद्दे को बनाए रखना चाहती है। लेकिन 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। इसके बाद ही ऐसा लगता है कि शाहीन बाग पर कोई निर्णायक कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल 8 फरवरी तक शाहीन बाग की बुलबुलें सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा गा सकती हैं।

(अजीत कुमार मिश्रा)