109 Views

सवाल

सवाल यह नहीं कि
मैं ग़लत था और तुम सही
सवाल यह भी नहीं कि
मैं खड़ा था तुम्हारे ख़िलाफ़
और तुम मेरे
सवाल यह भी नहीं कि
मैं अपने हक़ पर था
और तुम नाहक़
सवाल तुम्हारे ताक़तवर
और मेरे कमज़ोर होने का भी नहीं
सवाल यह भी नहीं कि
तुम देशभक्त
और मैं ग़द्दार
सवाल यह भी नहीं कि
कि मैं क्यों नहीं गया
यह मुल्क़ छोड़कर
जब मुझसे बहुतेरे जा रहे थे
सवाल यह भी नहीं कि
मैं तब क्यों चुप रहा
जब ज़ुल्म हो रहे थे
दूसरों पर बेतहाशा
सवाल यह भी नहीं कि
मैं तभी क्यों चीखता हूं
जब मुझे ही दर्द होता है
सवाल यह भी नहीं कि
मेरे दर्द पर मरहम रखने
क्यों नहीं आए तुम
और मैंने भी क्यों दीं ख़राशें
सवाल यह भी नहीं कि
मैं जाहिल ही कैसे रह गया
और तुम लगातार हुनरमंद
भाई मेरे
सवाल सिर्फ़ इतना है कि
एक रोज़ ख़ुद मैंने ख़ुद को
सवाल करने का हक़ दिया था
जैसे तुमने क़सम खाई थी
मेरे सवालों के जवाब देने के फ़र्ज़ की
सवाल सिर्फ़ मेरे सवाल करने के हक़ का
और जवाब देने के तुम्हारे फ़र्ज़ का है
जिससे तुम कभी मुंह चुरा रहे
तो कभी भाग रहे अपने फ़र्ज़ से
सवाल
मेरे सवाल को
सवाल समझने का है
मेरी ज़िद नहीं
मज़ाक नहीं
दीवानगी नहीं
ग़द्दारी नहीं
हुक्मउदूली नहीं
ज़बानदराज़ी नहीं
सिर्फ़ और सिर्फ़ सवाल
और सवाल यह भी नहीं कि
मेरे सवालों के जवाब
तुम्हारे पास हैं या नहीं
या तुम्हारे जवाब से
मेरी तस्कीन होगी या नहीं
फ़िलवक़्त तो सवाल सिर्फ इतना कि
मेरे सवाल करने के हक़ को
क़ुबूल किया जाए
और मेरे सवाल को
सिर्फ़ सवाल समझा जाए
कुछ और नहीं

-हूबनाथ पाण्डेय