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(अब्दुल हफीज़)

भारत की संस्कृति और सभ्यता विविधता में एकता के सूत्र पर टिकी हुई है। संत कबीर और गुलबर्गा स्थित सूफ़ी संत ख्वाजा बंदा नवाज़ के संबंधों के विषय में, उसी प्रकार गुरु ग्रंथ में बाबा शेख फरीद शकर गंज की वाणी सम्मिलित होने की जानकारी सभी भारतवासियों को है। आज स्वर्ण मंदिर के विषय में यह पता चला के इस की निव सूफ़ी मियां मिर जो मुग़ल शहज़ादा दाराशिक्हव के गुरु थे ने रखी।

ह्रदय में आशा कि किरण जाग उठी, और यह विश्वास हो गया के जिस एकता और भाईचारा की जडें इतनी मजबूत हैं उस वटवृक्ष को उखाड़ फेंकना संभव नहीं। विदेशी राजा बादशाह अर्थात आक्रमणकारी आए पर यहां के लोगों के संबंध में दरार डालने का हेतु सफल नहीं हुआ। छत्रपती शिवाजी महाराज के अंगरक्षक और सेना में उच्च पदस्थ मुस्लिम अधिकारियों का होना यह सिध्द करता है के लढा़ई दो राजा के बीच थी दो धर्म के विरुद्ध नहीं।

हम सब को यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए के राजनेताओ के षड्यंत्र को समझ कर हम अपने संबंधों को बली न चढ़ाए। जिस प्रकार से कई राजा आए और गये उसी तरहा सत्ता के लोभी भी कटूता निर्माण कर अपनी गद्दी हस्तगत करने का प्रयास करेंगे और अपना कार्यकाल समाप्त होने पर सत्ता से हट जाएंगे।

भारतीय लोकतंत्र और संविधान हर पांच वर्ष बाद हम को अपने मताधिकार द्वारा जनप्रतिनिधी नियुक्त करने का अधिकार प्रदान करता है। इस के महत्व को समझ कर स्वयं को कर्तव्यनिष्ठ नागरिक सिध्द करना यह समय की पुकार है। सावधान! सावधान! सावधान!