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(शहरेयार अतीक)

आज ही के दिन 11 साल पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पढ़ने वाले आज़मगढ़ के 2 छात्रों को उनके नाम और धर्म के कारण किसी आतंकवादी घटना से जोड़ कर एनकाउंटर कर दिया गया था, मेरे शहर को आतंक का गढ़ कह दिया गया था । सत्ता के नशे में चूर कांग्रेस सरकार व चिदम्बरम ने इस साजिश को अंजाम दिया था। आज़मगढ़ ने बड़ी मज़बूती से Rashtriya Ulama Council के नेतृत्व में इसके खिलाफ आवाज़ उठाया था और आज भी हिम्मत से इस आवाज़ को बचाये हुए है ।

कांग्रेस ने हमेशा की तरह आस्तीन के सांप जैसा व्यवहार बनाये रखा सत्ता खोनी पड़ी, मगर उम्मीद बनी आम आदमी पार्टी ने भी मायूस किया, किये गए वादे पर जवाब तक नहीं । सपा बसपा से उम्मीद लगाना मानो भैंस के आगे बीन बजाना हो, भाजपा को राजनीतिक फायदे की उम्मीद नहीं तो उनसे कहना ही सूदमन्द नहीं ,लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में बैठे अरविन्द केजरिवाल हों या मोदी सबसे इस जवाब मांगता रहा है आज़मगढ़ ।

एक बात और कि आज़मगढ़ के लोग उन हालातों से बखूबी वाकिफ हैं मैं भी छोटा था सारे मंज़र आज भी याद हैं लेकिन क्या आज़मगढ़ के लोग अपनी अपनी पार्टियों के चलते दामन पर लगे इन दागों को भूल जाएंगे आपके Rahtriya Ulama Council से राजनीतिक वैचारिक या जैसे भी मतभेद हो सकते हैं लेकिन क्या आपके मतभेद इस लड़ाई से बड़े हैं ?? बिल्कुल भी नहीं ।।

क्या आप इस मानसिकता में आये हैं कि आपके बच्चे किसी शहर में किसी भी लिए जाएं तो सिर्फ इसलिए कि उनका सम्बन्ध आज़मगढ़ से है इसलिए उन्हें रूम न दिया जाए ,क्या आप अपनी नई नस्ल को हक़ीर निगाहों से देखा जाना पसंद करेंगे ?? याद रहे कि भविष्य इन इतिहासों का जवाब ज़रूर मांगेगा ।

मैं नहीं कह रहा कि आप दिल्ली जाइये रैली में शामिल होइए मगर इतना ज़रूर कि आप जिन पार्टियों में हैं वहां इस पर बात कीजिये जहाँ रहिये वहां इसकी चर्चा कीजिये वकील हैं तो केस पर बात कीजिये छात्र हैं तो अपने कालेज में बोलिये किसान हैं तो खेतों में इस पर बात कीजिये बाज़ारो चौराहो,फेसबुक व ट्वीटर पर बात कीजिये ।

जहाँ रहिये वहाँ बटला हाउस की बात कीजिये । जांच की मांग करते रहिये मायूस नहीं होना है क्योंकि मायूसी कुफ्र है भूलिए नहीं कि आपके शहर को आतंक का गढ़ कहा जाए। ऐसा न हो कि कहना पड़े — आज19 सितम्बर है आज़मगढ़ वालों