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एक शूद्र को दैविक ज्ञान प्राप्त हुआ के असुरों को मार डालो। वैसे धर्म ग्रंथो के हिसाब से ये शूद्र भी असुर ही हैं। दो बच्चे थे जो खुले में पाखाना कर रहे थे। क्यों? क्यों के उन के घर “शौचालय” नहीं था। प्रधान सेवक ने तो कहा था के उन्होंने हर घर में पाखाना बनवा दिया है। वो सही कह रहे थे के हर घर में पाखाना बनवा दिया है। भला प्रधान सेवक झूठ बोल सकते हैं क्या। झूठे तो ये चंडालें हैं जिन को ना खाने की तमीज़ है और ना हगने की। झूठ तो ये बोलते हैं के इन के साथ ज़्यादती होती है। झूठ तो ये बोल रहे हैं के प्रधान ने इन दलितों के घर शौचालय नहीं बनने दिया। झूठ तो ये बोल रहे हैं के प्रधान के घर वालों ने ही इन बच्चों को मारा है।

सवाल ये है के इन बच्चों की क्या गलती थी? ये गलती थी के वो दलित पैदा हुए थे या उन को पैदा होते ही दलित मान लिया गया? या फिर इन का गरीब होना? सदियों से ऐसे बच्चे पैदा होते आए हैं जिन के माथे पर चंडाल लिख दिया गया और जिस की वजह से उन पर किसी भी तरह का ज़ुल्म जायज़ हो जाता है। ये बच्चे काल भी पैदा हुए थे मारे जाते थे आज भी पैदा हो रहे हैं मारे जा रहे हैं और कल भी पैदा होंगे और मारे जाएंगे। जिन लोगों ने इन बच्चों को मारा है हो सकता है के उन को सज़ा मिल जाए लेकिन क्या ये बच्चे वापस आ जाएंगे? इन के मां बाप को क्या इस सज़ा से सुकून मिल जाएगा?