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झाड़ू

इंसानों ने अपनी तहज़ीब की तरक्की के सफर में कई अहम और मज़ेदार इजादात किए हैं, मसलन आग, पहिया वगैरा वगैरा। लेकिन मेरे नज़दीक सब से मज़ेदार झाड़ू है।

कहानी झाड़ू की है। कहते हैं जब से इंसान है तब से झाड़ू है। अलग अलग ज़माने में अलग अलग शक्ल आे सूरत इख्तियार करती रही लेकिन काम एक ही रहा। सफाई।

आज की मौजूदा पस मंज़र में झाड़ू का काम और भी मज़ेदार हो गया है। जब से हम डब्बा नुमा घरों में रहने लगे हैं और घर का गंदा पानी पाईप लाइन से हो कर नाले नालियां में जाने लगा है तब से घरों में तेल चट्टे बहुत घूमने लगे हैं। इसलिए घरों में ख़्वातीन हाथों में झाड़ू और चेहरे पर गुस्सा लिए नज़र आ जाएंगी। अच्छी बात ये है के हाथ में झाड़ू और चेहरे पर गुस्सा आदमियों के लिए नहीं है बल्कि उन तेल चट्टाें के लिए है।

ये भी कह सकते हैं के तेल चट्टों की देन आदमी महफूज़ हो गए या फिर झाड़ू ने आदमियों को सुधार दिया। ये तेल चट्टे सब से पहले इंसान के पेट पर हमला करते हैं। मतलब के ये किचन के पाईप से निकलते हैं जहां खाना बन रहा होता है। लेकिन जब तेल चट्टे निकल आते हैं तो खाना बनना रुक जाता है और फिर तेल चट्टों के ख़िलाफ़ सब से कारगर हथियार निकाला जाता है, झाड़ू।

दुकानों में भी झाड़ू का इस्तमाल गन्दगी साफ करने और तेल चट्टे चूहे और दूसरे नुकसान दह कीड़े मकोड़ों को मारने के लिए होता है। सड़क पर फैली गन्दगी को भी साफ करने के लिए मुनिसिपालिटी वाले झाड़ू का इस्तमाल करते हैं। मज़ेदार ये है के उन के झाड़ू का डंडा बहुत लंबा होता है। सरकारी दफ़्तर, सरकारी हस्पताल, सरकारी स्कूल, निजी दफ़्तर, निजी हस्पताल, निजी स्कूल हर जगह झाड़ू का इस्तमाल होता है।

इसलिए झाड़ू की क़दर करनी चाहिए चाहे।

जय हो झाड़ू की।